दतिया (मध्यप्रदेश) स्थित मां पीतांबरा पीठ को तांत्रिक साधना का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यह पीठ देशभर में प्रसिद्ध है और यहाँ देवी मां बगलामुखी और धूमावती के स्वरूप में विराजमान हैं।
🔹 स्थापना
इस शक्तिपीठ की स्थापना सन 1920 के आसपास प्रसिद्ध संत परमहंस पंडित श्री श्री स्वामी जी महाराज (जिन्हें “सिद्धपुरुष” कहा जाता है) ने की थी।
स्वामी जी ने कठोर तप और साधनाओं के बाद इस स्थान को सिद्ध किया।
पीठ की अधिष्ठात्री देवी मां पीतांबरा बगलामुखी हैं, जो पीली वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए इन्हें “पीतांबरा” कहा जाता है।
🔹 धार्मिक और तांत्रिक महत्व
इसे भारत का सबसे बड़ा तांत्रिक साधना स्थल माना जाता है।
यहाँ मां बगलामुखी और मां धूमावती की आराधना होती है।
देश-विदेश से साधक यहाँ तांत्रिक साधनाओं के लिए आते हैं।
कहा जाता है कि यहां साधना करने वाले की हर मनोकामना पूरी होती है और साधक को विशेष शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
🔹 ऐतिहासिक घटनाएँ
मान्यता है कि सन 1962 के भारत-चीन युद्ध में यहाँ विशेष यज्ञ किया गया था, जिसके बाद युद्ध की परिस्थितियाँ भारत के पक्ष में बदलीं।
राजनेताओं, सैनिकों और बड़े-बड़े संतों ने इस पीठ पर आकर साधना की है।
🔹 वर्तमान
आज यह पीठ दतिया का सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल है।
नवरात्रि और विशेष पर्वों पर यहाँ लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं।
यहां साधारण भक्त से लेकर बड़े-बड़े राजनेता तक मां पीतांबरा के दर्शन के लिए आते हैं।
