‘राष्ट्रऋषि’ स्वामी विवेकानंद जी द्वारा 11 सितंबर 1893 को शिकागो धर्म संसद में दिया गया ऐतिहासिक भाषण आज भी विश्व भर में प्रेरणा का स्रोत है।
इस भाषण में उन्होंने भारतीय संस्कृति, धर्म, संस्कार और अध्यात्म का गौरवपूर्ण उद्घोष करते हुए सहिष्णुता, समन्वय, सार्वभौमिक भाईचारा और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के आदर्शों का प्रचार किया।
स्वामी विवेकानंद ने स्पष्ट किया कि भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए समर्पित आध्यात्मिक शक्ति है।
आज उनकी इस महान शिक्षाओं की 132वीं वर्षगांठ पर पूरे देशवासियों और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गई हैं।
